बेरोज़गारियों का , कैसा ये दौर ऊँची-
तालीम लेके वाजिब , मिलता न काम कोई ?
इंजीनियर लगाते , ले-ले के ठेला फेरी ,
चिल्लाते ले लो आलू , भिंडी-धना-तरोई !!
कैसा है रे ज़माना , पेट अपना पालने को ;
करते हैं लोग क्या-क्या , मतलब निकालने को ?
जिनको नहीं पता ख़ुद , के आने वाले कल का ,
है कारोबार उनका , औरों की पेशगोई !!
( पेशगोई = भविष्यवाणी )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

 

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