■ मुक्तक : 988 – इंतिज़ार

सब पूछना मगर न पूछना ये भूलकर सवाल ।। क्या है तुम्हारे बिन हमारा इन दिनों में हालचाल ? वर्ना तुम्हें जवाब कैसे देंगे ये कि हम को डर है , फ़रमा न जाएँ इंतिज़ार में कहीं हम इंतिक़ाल ?...Read more