■ मुक्तक : 989 – क्यों ?

तुम क्यों ये चाहते हो ,ठीक उनके कान में जा , खाई को गिरि ,रसातल ,को तूल बोल दूँ मैं ? संसार भर के आगे ,किस रौ में बह अकारण , मझधार को नदी की ,थिर कूल बोल दूँ मैं...Read more