■ मुक्तक : 990 – गुनाह

कैसा गुनाह हमसे , ये आज हो गया रे ? बोतल का वो हलाहिल , हमने दवा बताया ।। नुक़सान के सिवा जो , कुछ भी नहीं था उसको , हमने बड़े यक़ीं से , ख़ालिस नफ़ा बताया !! इस...Read more