■ मुक्तक : 991 – उलटी बातें

सिर पे न उसके कोई , दिखता पहाड़ लेकिन , कहता है बोझ भारी मैं रोज़ ढो रहा हूँ !! आँसू कभी लुढ़कते , गालों पे उसके कब पर , हँस-हँस के बोलता है , दिन-रात रो रहा हूँ ।।...Read more