ले दूरबीन और मशाल अपनी नज़र से ,
दिन-रात कर तलाश वो जा पा तो गए हैं ।।
हरगिज़ जहाँ न मै है न मैख़ाना कहीं पर ,
सिर पर ही अपना डेरा उठा आ तो गए हैं ।।
उसने कहा है , जिसपे मेरा दिल ये फ़िदा है ,
गर छोड़ दो शराब तो हो जाएँगे तेरे ,
कहने से उसके उसको ही पाने की गरज़ से ,
ताउम्र न पीने की क़सम खा तो गए हैं ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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