∆ सॉनेट : 06 – क़ब्र मत ढहा

कहते हैं कि मिटने वाले की गर कभी जाए निकल – बददुआ तो करके वो रख दे सभी कुछ हाय फ़ना । सचमुच में तो क्या ख्व़ाबों में तलक अपना तू महल , बस क़ब्र पे मेरी बराए मेह्रबानी न...Read more

∆ सॉनेट : 05 – राज़

तुम सब लोग मुझे समझो पूरा पागल इक , तो इसमें कुछ भी न तुम्हारी यार ख़ता है । है तुमको पूरा हक़ मुझको रोज़ करो दिक़ , नाखूनों से कौन कुआँ खोदा करता है ? मुझको बेइज्ज़त करने या...Read more

∆ सॉनेट : 04 – इश्क़

आज वो मुझसे रूठ चले किस तरह बुलाऊँ ? आज मनाने से भी वो वापस आ न सकेंगे । प्यास वो उनको आज नहीं फिर क्या मैं बुझाऊँ ? पेट भरा कुछ भी जो परोसूँ खा न सकेंगे ।। सोचूँ...Read more

∆ सॉनेट : 03 – एड्स

मियाँ बताए बग़ैर चुपके गया कहाँ पर ? निगाह बीवी की उसको रो-रो तलाशती है । जहाँ भी कोई बता रहा है कि है वहाँ पर ; वहीं ज़ुबाँ से नहीं वो दिल से पुकारती है ।। यक़ीन हालाँकि करना...Read more

∆ सॉनेट : 02 – याद

जिसने करके रख दिया , हँस-हँस मुझे बरबाद ; रख दिया जिसने बनाकर , हाय गुड़ से नीम ; गर्म लावे के लिए , पत्थर से आइसक्रीम ; आज भी फिर आए क्यों , दिन-रात उसकी याद ? सब भरोसे...Read more

∆ सॉनेट : 01 – सबक़

सचमुच न जानते थे , बारे में इश्क़ के जब ; थी उम्र कोई अपनी , मुश्किल से दस या बारह ; थी उस हसीं की लेकिन , पूरे बरस अठारह ; करने लगे थे उससे , हम प्यार वाले...Read more