तुझको बनते फूल जब-जब देखता ,
हाय भँवरा ही हुआ जाता हूँ सच ।।
तुझको छूते ही गुलाबों-मोगरों –
का मैं गजरा ही हुआ जाता हूँ सच ।।
रू-ब-रू होता है मेरे जब भी तू ;
कम से कम उस वक़्त तक दुनिया को मैं ,
तेरे इक दो लफ़्ज़ सुनने के लिए ,
एक बहरा ही हुआ जाता हूँ सच ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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