वो जो तस्वीर में मुझे लगे थे फूलों से ,
उनको जाना तो पाया उनसे अच्छे पत्थर हैं ।।
मात देते हैं तितलियों को शक्लोसूरत से ,
हाय तासीर में जो ख़ूँ के प्यासे मच्छर हैं ।।
जब तलक अजनबी थे हम हुजूर से सचमुच ;
नूर लगते थे मीलोमील दूर से सचमुच ;
रू ब रू उनसे जब हुए तो आह क्या देखा ?
कुंदा ए आबनूस से वो कम न तिल भर हैं ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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