■ मुक्तक : 1002 – तमन्ना

मुझको उसने न सिर्फ़ आँखों में जगह दी थी , बल्कि दिल में भी चंद रोज़ को बसाया था ।। उसको बेशक़ कभी न मेरी थी तमन्ना पर , मैंने बढ़चढ़ उसी के ख़्वाबों को सजाया था ।। हो रहा...Read more