■ मुक्तक : 1003 – बदल रहा हूँ मैं

नहीं कोई चिराग़ वर्ना आँधियों में क्यों , भले ही फड़फड़ा के फिर भी जल रहा हूँ मैं ? कटे नहीं है मेरे पैर तब तो काँटों पे , पहन के जूते ख़ूब तेज़ चल रहा हूँ मैं ।। मैं...Read more