[] नज़्म : 3 – फ़र्ज़

नहीं चाहता जिनकी सूरत भी देखूँ , उन्हीं के है दीदार का हुक़्म मुझको !! जिन्हें चाहता हूँ कि बस मार डालूँ ; मगर उनसे ही प्यार का हुक़्म मुझको !! तुम्हें क्या पता क्यों मैं जाता उधर हूँ ?...Read more