■ मुक्तक : 1005 – जला डाला

इक हिमालय को सबने मिलके अपनी ताक़त से , जा से सरकाने ज़ोर-ज़ोर से हला डाला ।। सख़्त पत्थर सा बर्फ़ आफ़्ताब से मिलकर , देखते-देखते ही मोम सा गला डाला ।। सबही आए थे सोचकर गुनाह करने को ;...Read more