जिसने करके रख दिया , हँस-हँस मुझे बरबाद ;
रख दिया जिसने बनाकर , हाय गुड़ से नीम ;
गर्म लावे के लिए , पत्थर से आइसक्रीम ;
आज भी फिर आए क्यों , दिन-रात उसकी याद ?
सब भरोसे उसकी ही तो , वज़्ह चकनाचूर ;
हाँ हुए ; अब हर किसी पर , मुझ को शक़ सौ बार ;
भोले-भाले दोस्त भी , लगने लगे अय्यार ;
हो गया उनसे सितारों , से ज़ियादा दूर ।।
रह गया बिलकुल अकेला , ख़ुद को सबसे काट ;
महफ़िलें ऐसी लगें , मरघट हों ज्यों ख़ामोश ;
नाचते-गाते भी सब , लगते मुझे बेहोश ;
सोचता हूँ रोज़ क्यों ना , ज़ह्र लूँ मैं चाट ?
जाएगी कब दिल से मेरे , उसकी ज़ालिम चाह ?
याद रखता कौन ऐसे , बेवफ़ा को आह ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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