मियाँ बताए बग़ैर चुपके गया कहाँ पर ?
निगाह बीवी की उसको रो-रो तलाशती है ।
जहाँ भी कोई बता रहा है कि है वहाँ पर ;
वहीं ज़ुबाँ से नहीं वो दिल से पुकारती है ।।
यक़ीन हालाँकि करना मुश्किल तो होगा ताहम ;
ये सच है उनमें नहीं था आपस में कोई झगड़ा ।
वो रह रहे थे महब्बतों से ज़रा न था ग़म ;
कि बस यकायक न जाने कैसे हुआ ये लफड़ा –
हसीन बीवी हुई मगर लाइलाज रोगी ;
पता चला एड्स ने उसे धर दबोच डाला ।
मियाँ गया सुन ख़बर ये कहते हैं बनने जोगी ;
न जाने क्या दिल ही दिल में उसने तो सोच डाला ?
क़ुसूर बीवी का कुछ नहीं पर ये शक़ तो शक़ है ।।
इलाज लुुुक़्मान पे भी इसका न अब तलक है ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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