∆ सॉनेट : 07 – अनुमानित चीज़ें

अंधा हूँ छू पूँछ को रस्सी कह देता हूँ ।। पग टटोल गज के जो उनको बोलूँ खंभा ।। रबड़ी यदि बिन चक्खे लस्सी कह देता हूँ , क्यों तुझको होता है यह सब देख अचंभा ? बिन दाबे चिकना-गीला...Read more