उस वक़्त भी कब रोया ?
उम्र का सब हासिल ,
दम भर में ही जब खोया ।।
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तुम रोओ महफ़िल में ;
हम भी ग़म रखते ,
लेकिन दिल ही दिल में ।।
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बस जिस्म है ताक़तवर ;
वर्ना दिल अपना ,
मुद्दत से है जर्जर ।।
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मुझको तुझसे जितना ,
तुझको भी क्या मुझसे –
सचमुच है प्यार उतना ?
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मत चाह मुझे तिल भर ,
पर ताड़ों जैसी –
नफ़रत तो न हरगिज़ कर ।।
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-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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