■ मुक्तक : 1006 – नवी

लोग दक़्यानूसी कहते , थे सभी जिसको , मेरी , अज़ सरापा आँख को , बिलकुल नवी लगती रही !! जाने थी किस गाँव की मैं , पूछ भी पाया नहीं , हाँ ! अदाओं से बड़े से , शह्र...Read more