∆ सॉनेट : 12 – दिल के सिर पर

दिल के सिर पर मैं अकेला बोझ ढोऊँ बेशुमार , क्यों करूँ उमीद आए कुछ न कुछ उठाए दोस्त ? वज़्ह है कि दर्द से कराहता नहीं हूँ यार ; तुम तो रोना जब भी तुमको कोई ग़म सताए दोस्त...Read more