[] नज़्म : 04 – क़सम

फ़क़त इक दिन में गिन-गिनकर , कम अज़ कम दस दफ़्आ योंही , मेरे आगे न अपने हुस्न का जल्वा करो आकर !! मुझे मालूम है गर्मी का मौसम आग बरसाता , है जब नल घर में तो पनघट पे...Read more