[] नज़्म : 05 – डायरी

इक इशारे पे मैं उसके क्या हुआ लँगड़ा व लूला , उसने मेरे प्यार को फिर ज़िन्दगी भर ना क़बूला ? सोच में हफ़्तों-महीनों क्या मैं सालों साल से था , अपनी उस रूदादे ग़म को जो मरी होते ही...Read more