[] नज़्म : 06 – बिस्मिल

इंसान को बदलना , मुश्किल से भी है मुश्किल ।। इक बाज़ से मुझे तुम , तो कर रही हो हारिल ।। आकर तुम्हारी बातों , में मैं बदल रहा हूँ , हाथी हूँ बंदरों सा , लेकिन उछल रहा...Read more