∆ सॉनेट : 13 – बारात

हर तरफ़ ये देखकर मैं हो रहा हूँ होज़ ; लड़के सेठानी से करते इश्क़ का आग़ाज़ , मर रहीं बूढ़े धनी पर लड़कियाँ हर रोज़ , मालोज़र ही क्या मोहब्बत का है अस्ली राज़ ? वो है हीरे की...Read more