[] नज़्म : 07 – बेरोज़गारी

दर्द क्या बेरोज़गारों का वो समझेगा अरे – जो विरासत के ख़ज़ाने पर मगन लेटा रहे ; और वो भी जिसको रोज़ी मिल गई आराम से ; तेरी बेकारी का किस्सा सुनके क्यों रोवे भला ? ठीक है हलकी सी...Read more