■ मुक्तक : 1010 – अपलक

देखो कि देखता हूँ मैं तुमको किस तरह से ? क्यों तुम न मुझको देखा करते हो इस तरह से ? सुधबुध को भूल अपनी अपलक निहारता है , कोई चकोर चंदा को ठीक जिस तरह से ।। -डॉ. हीरालाल...Read more