वो भले ही ख़राब है तो है ;
तिश्नगी ए शराब है तो है ।।
चाहे काँटों से है घिरा तो क्या ,
मुझको लाज़िम गुलाब है तो है ।।
वो चुकाए न हम कहें कुछ भी ,
उससे रखना हिसाब है तो है ।।
चौदवीं का वो चाँद है क्या शक़ ,
मुँह पे उसके नक़ाब है तो है ।।
उसका मिलना यक़ीं है मुश्किल है ,
फिर भी उसका ही ख़्वाब है तो है ।।
उसको पढ़ना तुनुक नहीं आए ,
हाथ में पर किताब है तो है ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

 

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