जिनके क़द हों बौने जिनमें पत्ते तक बचे हों कम ;

रखते हैं दरख़्त वे भी साये बाँटने का दम ।।

और मालदारों से जो मुफ़्त कुछ मँगाइए ,

तब ही ये कहेंगे ” हाथ तंग है गदा हैं हम ” !!

( दरख़्त = वृक्ष , साये = छाँव , गदा = भिखारी )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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