■ चित्र मुक्तक : चरवाहा

भेड़ों न बकरियों से मुझको कुछ दुलार है ।। गायों से भी न रंचमात्र प्यार-व्यार है ।। इनको चरा रहा हूँ अपना पेट पालने , मत चौंकिए ये मेरा सिर्फ़ रोज़गार है ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more