■ मुक्तक : 1013 – पागल

गर समझ जाओगे तुम मेरी हँसी का क्या सबब ? कह उठोगे चौंककर बेसाख़्ता पागल अजब ।। तो भला ख़ुद क्यों बताऊँ क्यों लगाऊँ क़हक़हा – मैं वहाँ जिस जा पे जा रोवे हैं बुक्का फाड़ सब ? -डॉ. हीरालाल...Read more