■ मुक्तक : 1014 – वादा

तेरी हर ख़्वाहिश तेरी फ़र्माइशों के वास्ते , बन पड़ेगा जिस तरह भी पर कमाकर जाउँगा ।। उम्र भर भी बैठकर तू खा सकेगा इस क़दर , तेरे ख़र्चों के लिए दौलत जमाकर जाउँगा ।। जाने क्यों लगता है मुझको...Read more