तेरी हर ख़्वाहिश तेरी फ़र्माइशों के वास्ते ,
बन पड़ेगा जिस तरह भी पर कमाकर जाउँगा ।।
उम्र भर भी बैठकर तू खा सकेगा इस क़दर ,
तेरे ख़र्चों के लिए दौलत जमाकर जाउँगा ।।
जाने क्यों लगता है मुझको तू न कुछ कर पाएगा ?
बाद मेरे धुप्प अँधेरों में कहीं खो जाएगा ;
मैं अमावस को भी पूनम जान जी लूँगा मगर ,
तुझको रातों के लिए सूरज थमाकर जाउँगा ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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