[] नज़्म : 10 – क्या कर रहा हूँ ?

अरे देखो मैं ये क्या कर रहा हूँ ? न टुक भी जिससे दिल को जोड़ना था , हमेशा जिससे मुँह बस मोड़ना था , जिसे तकते ही आँखें फोड़ना था , उसी उसका नज़ारा कर रहा हूँ ।। अरे...Read more