चढ़ता जोबन भी लुढ़कता सा जुरा लगने लगे ;
ख़ुद को जब ख़ुद का हसीं-चेह्रा बुरा लगने लगे ;
मत ज़रा होना मुशव्वश तब यही यह सोचकर ;
फूल-आईना भला अब क्यों छुरा लगने लगे ?
( जोबन =जवानी / जुरा =बुढ़ापा / मुशव्वश =परेशान )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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