इस ज़मीं पर नहीं और न उस ,

आस्माँ पर बनाऊँगा मैं ।।

सुन मुनादी मेरी आज ये ,

और यक़ीं कर बनाऊँगा मैं ।।

अपनी नज़रों में भी ना जगह

देने वाले इरादा मेरा ,

एक दिन तेरे पत्थर के इस ,

दिल में ही घर बनाऊँगा मैं ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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