मुक्तक : 1026 – प्यार

तन-मन में कूट-कूट प्यार भर के आए हैं ।। उड़-उड़ क़रीब सच बग़ैर पर के आए हैं ।। जब-जब किया तलब पलक झपक वो मुझ तलक , दुलहन की तरह ख़ूब सज-सॅंवर के आए हैं ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more

मुक्तक : 1025 – घूरना

नज़र का मेरी उसकी नज़रों से जाकर , हुआ एक लम्हा ही धोखे से लड़ना ।। ठिठक कर उसे देखकर एक दम में , हुआ पूरे इक सौ दफ़्आ चौंक पड़ना ।। उधर उसका मुझको बड़े ग़ैज़ में भर ,...Read more

मुक्तक : 1024 – हॅॅंसी

लबों के पुल से गोली सी , गुजरने के लिए आती ।। नहीं इन पर हॅंसी पल भर , ठहरने के लिए आती ? मेरी दुश्मन नहीं फिर भी , ये बदली क्यों बरसने का , मेरे सूखे से वादा...Read more

∆ ग़ज़ल : 301- बालम

जागते-सोते या चल या थम नहीं देता ।। हाॅं ! मुझे अब कोई भी ग़म ; ग़म नहीं देता ।। वो मुझे कुछ भी कभी भी और फ़ौरन ही , जितना माॅंगूॅं उससे टुक भी कम नहीं देता ।। हैं...Read more

∆ ग़ज़ल : 300 – आब ए अंगूर

तुम फलोदी को क्या चिकमगलूर कर दोगे ? सादा पानी आब ए अंगूर कर दोगे ? मैं बता दूॅंगा उदासी का सबब लेकिन , क्या उदासी फिर मेरी तुम दूर कर दोगे ? रात दिन चाहूॅंगा तुमको जीते जी मर-मर...Read more

∆ ग़ज़ल : 299 – मुंतज़िर

ख़ुदकुशी से ख़ुद को ऐसे रोकता खड़ा रहा ।। सुब्हो-शाम , रात-दिन शराब पी पड़ा रहा ।। मुझसे मिलने कह गया था जिस जगह वो आएगा , मुंतज़िर मैं उस जगह पे उम्र भर खड़ा रहा ।। वो अड़ा रहा...Read more