मुक्तक : 1023 – रद्दोबदल

सतपुड़ा के पहाड़ों सा कब से खड़ा , वक़्त सा अब थके बिन चला जा रहा ।। मरघटी चुप्पियों से उलट कृष्ण की , बाॅंसुरी सी मधुर धुन बना जा रहा ।। देख रद्दोबदल मुझमें ऐसा सभी , सख़्त हैराॅं...Read more