∆ ग़ज़ल : 301- बालम

जागते-सोते या चल या थम नहीं देता ।। हाॅं ! मुझे अब कोई भी ग़म ; ग़म नहीं देता ।। वो मुझे कुछ भी कभी भी और फ़ौरन ही , जितना माॅंगूॅं उससे टुक भी कम नहीं देता ।। हैं...Read more