मुक्तक : 1024 – हॅॅंसी

लबों के पुल से गोली सी , गुजरने के लिए आती ।। नहीं इन पर हॅंसी पल भर , ठहरने के लिए आती ? मेरी दुश्मन नहीं फिर भी , ये बदली क्यों बरसने का , मेरे सूखे से वादा...Read more