मुक्तक : 1025 – घूरना

नज़र का मेरी उसकी नज़रों से जाकर , हुआ एक लम्हा ही धोखे से लड़ना ।। ठिठक कर उसे देखकर एक दम में , हुआ पूरे इक सौ दफ़्आ चौंक पड़ना ।। उधर उसका मुझको बड़े ग़ैज़ में भर ,...Read more