मुक्तक : 1028 – इश्क़

उदासी से है इस क़दर इश्क़ लब पर , ख़ुशी में भी हरगिज़ तबस्सुम न लाऊॅं ।। अज़ीज़ इस क़दर सख्त़ काॅंटे कि उसको , दूॅं सौग़ात तो नर्म क़ुर्तुम न लाऊॅं ।। सियह रात कर दोपहर जुगनू जाते ;...Read more