मुक्तक : 1029 – बेवुक़ूफ़

सोचता हूॅं कभी – कभार होश में पूरे , मुझको सबने ही बेवुक़ूफ़ क्यों बना डाला ? मैंने पाया जवाब लेके हाथ में अपने , एक बोतल शराब एक काॅंच का प्याला ।। जागती ऑंख को बड़े – बड़े दिखा...Read more