हम तलवारों से सब्जी-भाजी काटें ,

भालों से कपड़े सिलने का काम करें ।।

पाॅंवों को हाथों में रख सिर से भागें ,

लेटे-लेटे काम खड़े आराम करें ।।

ये सब देख चिढ़ाते हॅंस-हॅंस पड़ते हैं ,

यूॅं ही आ आकर बेमतलब लड़ते हैं ,

आख़िर क्यों दुनिया वाले हमको घर-घर ,

पागल-पागल कह-कह कर बदनाम करें ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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