मुक्तक : 1036 – बशर्ते

बाग़ से फूलों के जैसे मैं ज़मीं से , आस्माॅं से दिन में तारे तोड़ देता ।। मोमबत्ती जैसे फ़ौलादी सलाखें , चुटकियों में हॅंसते-हॅंसते मोड़ देता ।। हाॅं ! बशर्ते मुझसे वो कहते लजाकर , ज़िद पे अड़के ,...Read more