∆ ग़ज़ल : 303 – हाथ मलते हैं

दिल में बस इक-दो नहीं ग़म लाख पलते हैं ।। ऑंख से ऑंसू न अलबत्ता निकलते हैं ।। लोग घूमें घर में मोटर-कार में बैठे , और हम पैदल भी मीलों-मील चलते हैं ।। हमसे फूलों का कुचलना भी नहीं...Read more