मुक्तक : 1039 – तब और अब

पहले बिस्तर देखते ही नींद आ जाती थी अब , नींद की गोली के बिन सोना नहीं आता हमें ।। जागते भी कितने सपने कल तलक देखे और अब , नींद में भी ख़्वाब में खोना नहीं आता हमें ।।...Read more