∆ ग़ज़ल : 306 – बाज़ियाॅं

इक के बाद इक इश्क़ की हारे गया मैं बाज़ियाॅं ।। और वाॅं करते रहे वो शादियों पे शादियाॅं ।। दिल तो मिलना दूर इज़हार ए मोहब्बत पर मुझे , उनकी जानिब से मिली है गालियों पर गालियाॅं ।। उनकी...Read more