मुक्तक : 1040 – नक़ाब

डर , उनके हुक़्म से उन्हीं के रोब ओ दाब से ।। चेहरा छुपा दिखा दिया हमने नक़ाब से ।। अफ़्सोस है कि जिनकी हम नज़रों में कल तलक , थे आफ़्ताब हो गए अब माहताब से ।। -डॉ. हीरालाल...Read more