डर , उनके हुक़्म से उन्हीं के रोब ओ दाब से ।।
चेहरा छुपा दिखा दिया हमने नक़ाब से ।।
अफ़्सोस है कि जिनकी हम नज़रों में कल तलक ,
थे आफ़्ताब हो गए अब माहताब से ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *