मुक्तक : 1043 – पलटा

जाने क्या हासिल हुआ या खो गया या छिन गया , तर्ज़ो अंदाज़ आजकल सब खा गया पलटा मेरा ? पाॅंवों से करता हूॅं अपने सब के सब ही काम मैं , कारवाॅं दिन-रात अनथक हाथों से चलता मेरा ।।...Read more