बद्दुआ निकले है मेरे दिल से ये ही आजकल ;
इश्क़ में लग जाए ऐसी आग वो बस जाए जल ।।
कोयला उसने मुझे हीरे से करके रख दिया ,
मैं भी चाहूॅं वो भी ज़र से जाए मिट्टी में बदल ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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